Give us a missed call at  
0803 063 6232  
 

My Kidney Story

Vandana Yadav's

Hello, I am a kidney receiver and this is my kidney story. I am a happy and healthy homemaker right now. My story gave me my life philosophy that life is like a game of cards: unexpected. Somehow destiny played its cards not quite in my favour. My kidneys failed and I had to ultimately opt for a transplant in 2014. Then a series of events followed; diagnosis performed all sorts of rituals and prayers possible, alternate treatments like homeopathy. We visited a very famous homeopathic doctor in Kolkata, but unfortunately, it wasn't any good. Ultimately we had to get a transplant done.

The situation was hard and an absolute chaos but as God would have it, I was not alone in it; God was before me, beside me. I was put in the hands of very qualified doctor who ensured that we got the best options to tackle the situation. I am also deeply grateful for the unconditional love and support of my husband, children and parents.
My brother was highly supportive.  He was truly our saviour. He was my donor and was very sporting about it. His courage was impeccable and with God's grace, we happened to have an absolutely perfect match. The surgery did not have any deteriorating effects on him whatsoever and he is still in the pink of his health. The transplant went smoothly without any complications.

An year after the transplant, according to me, has been easier than ever. Except for a few minor precautions with food and water, the post-transplant life has been a smooth ride. In fact, I am at a better place after the transplant. My blood pressure seems to be in control lately and my diabetes hasn't been causing any major inconvenience. I want my story to show people how the taboo regarding transplants and organ donation are completely off from the reality.
The way I recovered and started supporting my family again, I hope everyone else going through the same situation does as well.

 

Gr Goyal’s Kidney Experiences


I am Dr. A.K. Goyal, Chief Medical Officer at MPSEB Govindpura Bhopal. During my 30 years of clinical experience I have been treating and counseling kidney patients in different stages of chronic illness. General population fears kidney disease but is unaware of the measures to prevent it. They must be made aware of harmful effect of constant, long term and indiscriminate use of analgesics and antibiotics. Patients suffering from Hypertension and Diabetes are prone to kidney disease. Such patients should ensure good control of blood pressure and blood sugar so that the kidney function is preserved for long time. Patients with early kidney dysfunction need to be particular about their diet, while advanced kidney disease has to be managed with Dialysis or Renal Transplant.

In order to spread awareness about kidney disease, the volunteer group should first be trained by super specialists and then they can educate the eligible sections of the society. The volunteers need to spell out clearly the time and effort, they can spare for welfare activities. Volunteers should be encouraged and motivated to contribute monetarily to preserve the momentum of the welfare activities. The Volunteers should come out with their strength and areas of interest so that they may be assigned suitable responsibility. We also need to counsel, encourage and mentally prepare prospective donors, to come forward for organ donation. Small video clips may be prepared by specialists, beneficiary patients and their respective donors. These may be played in the waiting areas of Nephrologists, Uro-surgeons, Hospitals and Clinics.

It would serve to make the people aware of the kidney disease and the options available to them to choose from and lead a healthy life A few dieticians should also be a part of the awareness campaign and education program me. We must explore links with charitable institutions who may provide financial support to the deserving kidney patients. We must seek support of some spiritual organizations, who serve to preserve the morale of the patient and family members, when they feel deserted and left out by family and friends

 

बीमारी से मिली तकलीफों का अनुभव

मैं कृष्‍ण कुमार चौहान वरिष्‍ठ सहायक कार्यपालन यंत्री परीक्षण संभाग - दो म.प्र. पा. ट्रां. कं. लि. भोपाल में कार्यरत हूं। बात उस समय की है सन 2000 में इलाहाबाद में कुम्‍भ लगा हुआ था। मैं  पिपरिया में कार्यरत था वहां के साथियों के साथ कुम्‍भ नहाने इलाहाबाद गया था। उन दिनों मुझे दांत में तकलीफ रहती नासमझी में दर्द निवारक गोलियां बहुत खाता था। इलाहाबाद में भी 5.6 दिन तक लगातार दिन में दो-तीन गोलियां खाते रहा जब 6 दिन बाद इलाहाबाद से पिपरिया लोटा तो मेरे चेहरे पर हाथ पैर में कुछ सूजन समझ में आई। पिपरिया में यूरिन टेस्‍ट में प्रोटीन की मात्रा पाए जाने पर डाक्‍टरों ने जबलपुर में में दिखाने की सलाह दी जबलपुर में उस समय कोई किडनी स्‍पेशलिस्‍ट से मिले उनके द्वारा कराए गए टेस्‍टों के आधार पर उन्‍होनें 65 प्रतिशत किडनी डेमेज होना बताया बहुत आघात लगा खाना पीना भूल गएा, ज्‍यादा दिन जिंदा रहने की उम्‍मीद खत्‍म्‍ हो गई चलना फिरना दूभरहो गया घर में उदासी छा गई पत्‍नी और दो मासूम बच्‍चे हंसना भूल गए तबीयत ज्‍यादा खराब हो गई चोहथराम इंदौर में 2 महीने एडमिट रहे पैसे खत्‍म्‍ हो गए, ऑफिस की तरफ से भी कोई सहायता नहीं मिली और रिश्‍तेदारों ने दूरी बना ली कही पैसे न मांगने लग जाए।

उन्‍हीं दिनों एक बार हमारे J. E. अशोक गुप्‍ता मुझे देखने घर आए बच्‍चे स्‍कूल गए थे, पत्‍नी कुछ काम से बाहर गई थी गुप्‍ता जी ने मुझसे पूछा कैसे हो मैंने कहां बस कुछ दिनों के मेहमान है । उन्‍होंने बहुत सख्‍त लहेजे में मुझे समझाया तुम तो मर रहे हो हिम्‍मत करो अपनी इच्‍छा शक्ति मजबूत करो खडे हो जाओं अपने बच्‍चों की हंसी वापिस लाओं । मैंने अपनी इच्‍छा शक्ति मजबूत की अपने को बीमारी से उभारा मुझमें हिम्‍मत आई और खड़ा हो गया उस दिन से आज तक अपने को बीमार नहीं समझा । इस बीच इलाज कराते रहा जिन्‍होंने जहां बोला जो परहेज बोला जहां जाने का बोला सब करते रहा परहेज में प्रोटीन की मात्रा कम करने को कहां मैंने प्रोटीन कम करने के लिए 10 साल दाल नहीं खाई। 24 घंटे में सिर्फ 1 लीटर तरल पदार्थ लिया जिसमें पानी भी शामिल रहा । इसी परहेज और इलाज के बल पर 65 प्रतिशत डेमेज किडनी 10 साल तक चलाई । सभी जगह डॉक्‍टरों ने किडनी ट्रांसप्‍लांट की सलाह दी किडनी हॉस्पिटल नदियाद (गुजरात) में मुझे किडनी ट्रांसप्‍लांट के रिजल्‍ट ठीक लगे वहां की व्‍यवस्‍था ठीक लगी नदियाद हॉस्पिटल ट्रस्‍ट द्वारा संचालित है इसलिये हमारी कंपनी से पैसेका किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं हो सका लेकिन किडनी की व्‍यवस्‍था करने में मुझे काफी परेशानी हुई, हम 4 भाई और 1 बहन है। 4 भाई का ब्‍लड ग्रुप भी एक ही है । लेकिन मेरे तीनों भाईयों ने किडनी देने से मना कर दिया। मेरी पत्‍नी जो पहले से ही बोलती थी कि मैं ही दूंगी आखिर उसकी किडनी से में आज जिंदा हूं और मेरी पत्‍नी भी  पूर्ण रूप से स्‍वस्‍थ्‍य है ।



किडनी ट्रांसप्‍लांट के बाद आई मुश्किलें

6 जनवरी 2010 को मैंने अपना किडनी ट्रांसप्‍लांट किडनी हॉस्पिटल नदियाद (गुजरात) में कराया। जो कि ट्रस्‍ट द्वारा संचालित है। MPPTCR द्वारा मुझे कोई भुगतान नहीं हो पाया । सारे खर्च मुझे सहन करने पड़े किडनी ट्रांसप्‍लांट के समय लगभग 8 लाख रूपये खर्च हुए इसके पहले 10 साल बीमारी से जुझता रहा इसमें मैं बहुत कर्जदार हो गया, किडनी ट्रांसप्‍लांट के बाद किडनी सुचारू रूप से कार्य करें और कोई इंफेक्‍शन न हो इसके लिए लगभग16 हजार रूपये महीने की दवाई लेनी पड़ रही थी, मासिक आमदानी उस 30 हजार के लगभग थी बड़ी मुश्किल से खर्चे चल रहे थे कर्ज नहीं पट पा रहा था। उसी समय माह जुलाई 2010 में मेरे लड़के की तबीयत ज्‍यादा खराब हो गई मेरी पत्‍नी लड़के को लेकर MPEB हॉस्पिटल गई वहां डॉ. गोपाल सा. को दिखाया और बताया कि हम बहुत परेशान है लड़का 2 महीने से बीमार चल रहा है। बार-बार बुखार आ रहा है और पति का किडनी ट्रांसप्‍लांट हुआ है उन्‍हें 16 हजार रूपये महीने की दवाई लग रही है सा‍थ में लगभग 2 लाख का कर्ज भी है। गोयल सा. ने पत्‍नी को समझाया और कहां पति को हमारे पास पहुंचाओं जब मैं डॉ. गोयल सा. से मिला तो उन्‍होंने जुलाई 2010 से लगातार हर महीने मेरा इलाज किया जिससे हर महीने मुझे कंपनी से पैसा मिलने लगा, लड़का भी ठीक हो गया धीरे-धीरे कर्ज खत्‍म हो गया । आज हम बहुत अच्‍छी जिन्‍दगी बसर कर रहे है। मैं और मेरी पत्‍नी दोनों स्‍वस्‍थ्‍य है। हम डॉ. गोयल सा. के आभारी है जिन्‍होंने हमें सही रास्‍ता दिखाया ।


Copyright © 2015 Let's Talk Kidneys Powered by SynQues - ISO 9001:2008 Legal Disclaimer / Privacy Policy / Sitemap